Lootcase Review: कॉमेडी अच्छी लेकिन कहानी का कुछ अता पता ही नही।

फ़िल्म की कहानी!

आमतौर पर फिल्म की कहानी वही है जो सभी फिल्मो में होती है। एक पैसों से भरा बैग एक आम आदमी मिल जाती है और फिर उस पैसे से भरे बैग के पीछे पड़े लोग धीरे-धीरे सामने आते जाएंगे और फिर चूहे बिल्ली जैसा यह खेल काफी इंटरटेनिंग होता जाएगा। फ़िल्म लूटकेस में भी यही होता है। जैसे ही बैग नंदन को मिलता है, धीरे-धीरे उस बैग के कई हकदार इस कहानी से जुड़ते चले जाएंगे।


फ़िल्म में किरदार

इस फ़िल्म में गजराज राव इस बार एक विलेन की भूमिका में दिखाई देंगे। मंत्री पाटिल, जिसका वो बैग है। इंस्पेक्टर कोलटे जिसकी भूमिका में रणवीर शौरी काफी सशक्त रूप से दिखाई देते हैं,मिनिस्टर पाटिल के साथ काम करते है । विजय राज़ वही कर रहे हैं जो वो बेस्ट करते हैं – गैंगस्टर बनना। इस बार कुछ अलग करती दिखाई दी हैं रसिका दुग्गल और रसिका दुग्गल पर, पति पर हमेशा भड़की हुई एक कॉमन लेडीज लता का किरदार अच्छा लग रहा है।

Pic credit: Hotstar Disney instagram


कॉमेडी टाइमिंग कैसी है?

फिल्म की कॉमिक टाइमिंग अच्छी है। खासतौर से कुणाल खेमू की। फिल्म के डायलॉग्स और एडिटिंग इसकी कॉमिक टाइमिंग और शानदार बनाती है। फिल्म की शुरूआत ही एक अच्छी कॉमेडी का वादा करती है सुलभ शौचालय के सामने जब नंदन को सूटकेस मिल जाता है जोकि 2000 के नोटों से भरा होता है। मगर फिर भी इस कॉमेडी से दर्शकों को ज़्यादा मजा नहीं आता है। ऐसा लगता है कि चुटकुले शुरू होते हैं मगर सही जगह खत्म नहीं हो पाते हैं। हालांकि कपिल सावंत के डायलॉग्स आपको कुछ बेहतरीन पंचलाइन्स ज़रूर देते हैं। ज्यादातर जब इनमें गजराज राव के हिस्से आती हैं जो दर्शकों को बहुत अच्छा लगता है।

कलाकारों की अभिनय?

इस फिल्म की स्टारकास्ट काफी शानदार है और इसलिए हर किरदार अपने बेटर फॉर्म में दिखता है। दर्शकों को खींचने और बांधे रखने का हुनर कुणाल खेमू में जो उनके नंदन में भी साफ दिखाई देता है। एक आम आदमी के किरदार में कुणाल का भोलापन भा जाता है और इनकी यही मासूमियत इस फिल्म के क्लाईमैक्स में भी सब कुछ पता होते हुए भी आपको फ़िल्म से बांधे रखती है।

फ़िल्म का डायरेक्शन?

फ़िल्म को दर्शकों से बांधे रखने की पूरी कोशिश राजेश कृष्णन ने की है मगर ये फिल्म कहानी से ज़्यादा शानदार स्टारकास्ट की वजह से अच्छी लगती है। हर कोई इस फिल्म की कमियों को अपनी अभिनय क्षमता से भरने की कोशिश करता दिखाई देता है। दिक्कत बस इतनी है कि कमियों को भरने को कोशिश कई बार साफ-साफ दिखाई दे जाती है और वहीं पर फिल्म दर्शकों से छूटती दिखती है। यह फिल्म अपने पहले सीन से एक शानदार कॉमेडी का वादा करती है लेकिन अपनी ही उम्मीदों के बोझ तले फ़िल्म दब जाती है।

फ़िल्म की तकनीकी पक्ष

फिल्म में राजेश कृष्णन की स्क्रिप्ट , अच्छे संवादों और कहानी के बावजूद भी पूरी फिल्म दर्शकों को बांधने में असफल हो जाती है। इसलिए यह फिल्म डार्क कॉमेडी और व्यंग्य के वादे बड़े करता है लेकिन यह चलते-चलते थक जाता है। सोनू जॉन सिनेमैटोग्राफर का कैमरा इस फिल्म के लिए अच्छा काम करता है।फ़िल्म को दिशा देने की कोशिश आनंद सुबाया की एडिटिंग करती है लेकिन असफल होये हुऐ दिखती है।

फ़िल्म में अधूरे चुटकुले

चीज़ों को शुरू कर उन्हें पूरा नहीं करना इस फ़िल्म की कमी है । जैसे कि नंदन की दीदी का जिक्र पूरी फिल्म में होता है, लोग नंदन की दीदी का इंतज़ार करते हैं लेकिन की दीदी फ़िल्म में आती ही नहीं है। वो फ़िल्म का एंगल उसी तरह अधूरा छोड़ दिया गया है जो कि दर्शकों को निराश करता है। इस तरह फिल्म में कई अन्य चीज़ें भी है जो एक अच्छे सब प्लॉट की ओर इशारा करती हैं लेकिन उसे पूरा नहीं करती हैं।

ओवरऑल फ़िल्म दिल जीत जाती है!

इन सभी कमियों के बावजूद भी फिल्म अपने बेहतरीन किरदारों से दर्शको का दिल जीतती है। इस फ़िल्म में हर किरदार का ग्राफ अच्छा है। कुणाल खेमू ,नंदन की भूमिका में जहां ,एम्प्लोयी ऑफ द मंथ, बनना चाहते हैं वही लाता का किरदार में रसिक दुग्गल पड़ोसियों के ताने और घर चलाने के बोझ तले दबी हुई महिला बनकर दर्शकों का दिल जीतती हैं। आर्यन प्रजापति नंदन और लाता के छोटे से बेटे के रूप में भी कुछ हंसी के फुहारों छोड़ते हैं।

फ़िल्म में कहां हुई चूक हुई?

इस फिल्म के गाने और म्यूज़िक इसकी गति तोड़ते हैं तो वहीं कुछ अच्छे चुटकुलों की शुरूआत होना पर इसका फ्लैट गिर जाना कहीं ना कहीं दर्शकों को निराश करता है। इसलिए यह फिल्म दर्शकों का दिल नहीं जीतती है लेकिन इसके एक्टर्स दर्शकों का दिल जीत लेते हैं।

फ़िल्म को देखें या ना देखें?

फ़िल्म लूटकेस एक बेकार नहीं है बस थोड़ी सादी खिचड़ी है लेकिन इसके साथ अचार और पापड़ नहीं है। भूख ज़्यादा हो तो सादी सी खिचड़ी भी खा सकते हैं। और कभी-कभी गर्मागर्म सदी खिचड़ी भी स्वादिष्ट लग जाती है। तो बस आप समझ लीजिए लूटकेस वही सदी सी खिचड़ी है। लूटकेस फिल्म में आपका समय बर्वाद नहीं होगा बस आपका मूड है तो। इस फ़िल्म को आप हॉटस्टार पर देख सकते है

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