Raat Akeli Hai Film Review: मर्डर मिस्ट्री और शानदार एक्टिंग का मिश्रण !

‘रात अकेली है’ की कहानी

उत्तरप्रदेश के एक हाई प्रोफाइल केस सीनियर इंस्पेक्टर जटिल यादव (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) के पास आता है। हवेली के ठाकुर की दूसरी शादी हो रही होती है, तब उसी समय ही हवेली की ठाकुर की हत्या हो जाती है। उसका पूरा परिवार उस समय घर में ही मौजूद रहता है, लेकिन किसी को भी उसकी हत्या की कोई भी भनक नहीं लगता। या हो सकता है सभी कुछ ना कुछ छिपा रहे है । ठाकुर की हत्या किसने की और क्यों, यह मामला काफी पेचीदा है। ठाकुर के परिवार में में एक बेटा, एक बेटी, उसके छोटे भाई की विधवा पत्नि, उसके एक बेटे- बेटी, ठाकुर के पहली पत्नी का भाई, एक नई नवेली दुल्हन राधा (राधिका) और एक नौकरानी है। पितृसत्तात्मक मानसिकता से भरे इस घर में हर एक पर एक दफा शक की सुई जाती है। लेकिन हर किसी की नजर ,राधा पर टिकी होती है । सब राधा को ही आरोपी मानते हैं। लेकिन राधा पर इंस्पेक्टर को भरोसा होता है और कुछ लगाव भी। इस फ़िल्म की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती जाती है, एक के बाद एक कई नई परतें खुलती रहती हैं और हर नई कड़ी पिछली कड़ी से जुड़ती हुई रहती है। इंस्पेक्टर जटिल यादव की ,राधा पर भरोसा करना सबसे बड़ी भूल ,साबित होगी? इंस्पेक्टर जटिल यादव क्या झूठ के जाल को काटकर , इस केस की हकीकत तक पहुंच पाएगा?

Pic Credit: Nawazuddin instagram

फ़िल्म में अभिनय

इस फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इस फ़िल्म के आर्टिस्ट हैं। इंस्पेक्टर जटिल यादव के किरदार में नवाजुद्दीन सिद्दीकी बेहतरीन लग रहे हैं। उन्होंने इस किरदार के संवेदना, गुस्से,गंभीरता और सनकपन को हानियों को तरीके से पेश किया है। वहीं, राधिका आप्टे नवाज के सामने मजबूत टिकी रही। इन दोनों के बीच के संवाद और दृष्य इस फिल्म को मजबूती देते हैं। इला अरुण नवाजुद्दीन सिद्दीक़ी के मां के किरदार में जबरदस्त लगी रही हैं। उनका रिश्ता बेटे के साथ एक हल्कापन लाता है। एक डार्क टोन में पूरी फिल्म बढ़ती है, लेकिन कलाकारों की वजह से यह बोझिल नहीं करती। तिग्मांशु धूलिया,शिवानी रघुवंशी, श्वेता त्रिपाठी, निशांत दहिया ,आदित्य श्रीवास्तव, इस सब ने अपने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।

फ़िल्म के निर्देशन

मुकेश छाबरा और कास्टिंग डाइरेक्टर हनी त्रेहान ने भी बतौर निर्देशक नई शुरुआत की है। कई मर्डर- मिस्ट्री- थ्रिलर बॉलीवुड में आ चुके हैं, लेकिन ‘रात अकेली है’ में कुछ अलग बातें हैं, जो की इसे बाकी बॉलीवुड फिल्मों से अलग बनाती है। यह फिल्म अपने सब्जेक्ट को लेकर बेहद स्पष्ट दिखती है। लिहाजा, फिल्म देखने के दौरान उत्सुकता,डर, धोखा,दवाब विकृत मानसिकता.. सभी एक्सपेशन सामने आते हैं। निर्देशक का इस फिल्म काफी नियंत्रण दिखता है।

फ़िल्म के तकनीकि पक्ष

स्मिता सिंह ने इस फ़िल्म की स्क्रिप्ट लिखी है। इन्होंने ही सेक्रेड गेम्स वेब शो लिखा था। यह फ़िल्म इस पक्ष में थोड़ी ढ़ीली दिखी है। धीमी गति से चलती इस फ़िल्म का क्लाईमैक्स जल्दबाजी में निपटाया सा लगता है। वहीं, इस फ़िल्म में लव स्टोरी का ट्रैक बेफिजूल सा लगता है। फ़िल्म की एडिटिंग श्रीकर प्रसाद ने की, यह थोड़ी और चुस्त हो सकती थी। फिल्म की लंबाई लास्ट एन्ड तक पहुंचते-पहुंचते बोर करती है। ढ़ाई घंटों तक फिल्म का रोमांचक बनाए रखना, काफी मुश्किल प्रतीत होता है। थोड़ी और कसी हुई स्क्रिप्ट और कसे हुए कैरेक्टर.. फिल्म को काफी बेहतर बना सकते थे।

फ़िल्म में क्या अच्छा, क्या बुरा!

नावजुद्दीन सिद्दीकी फिल्म घूमकेतु के बाद इस रंग- ढ़ंग में देखना तसल्ली देता है। फिल्म के संवाद,ड्रामा सिनेमेटोग्राफी, इस फ़िल्म के मजबूत पक्ष हैं। वहीं, दूसरी और फिल्म का एकमात्र नेगेटिव पॉइंट इस फ़िल्म की लंबाई है, जिसे की काफी अच्छी खासी एडिटिंग की जरूरत थी।

फ़िल्म देंखे या ना देंखे?

फ़िल्म ‘रात अकेली है’ दर्शकों को ढ़ाई घंटों तक बांधे रखती है, और मनोरंजन करती है। लेकिन फ़िल्म अपना प्रभाव लंबे समय तक नहीं छोड़ती है। यदि आप बॉलीवुड ड्रामा-संस्पेंस पसंद करते हैं, तो आपको यह फिल्म निराश नहीं करेगी। ‘रात अकेली है’ को हमारी ओर से 3 स्टार मिले।

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