Pareeksha Film Review: एजुकेशन सिस्टम की पोल खोलती प्रकाश झा की शानदार फ़िल्म!

Pareeksha Film Review: एजुकेशन सिस्टम की पोल खोलती प्रकाश झा की शानदार फ़िल्म!

परीक्षा रिव्यु : यह कहानी मजबूरी, मेहनत और संघर्ष की है, आदिल ने छोड़ी छाप

निर्देशक प्रकाश झा के द्वारा बनाई फिल्म ‘परीक्षा’ रिलीज हो चुकी है. यह फ़िल्म भारत की शिक्षा प्रणाली पर बनी है, इस फ़िल्म में क्या है खास और आपको इसे क्यों देखना चाहिए. हम आपको बता रहे हैं अपने इस फ़िल्म की रिव्यू में.

फिल्म : परीक्षा

कलाकार: आदिल हुसैन, प्रियंका बोस, सुभम,शौर्य दीप

निर्देशक: प्रकाश झा

परीक्षा फ़िल्म की कहानी एक स्कूली छात्र बुलबुल कुमार की है, जो की प्रतिभाशाली होकर भी अपने लिए एक बेहतर मौके की तलाश में होते है. लेकिन बुलबुल कुमार के पिता बूची पासवान जो की रिक्शा चलाकर अपने पूरे परिवार का पेट पालते हैं और उसके पास इतने पैसे भी नहीं होते है कि वो अपने होशियार बेटे को अच्छी शिक्षा दिला सके. एक दिन बूची पासवान की किस्मत खुल जाती है और उसे अपने बच्चे बुलवुल का दाखिला प्राइवेट स्कूल में कराने के लिए पैसे मिल जाते हैं. लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाती और बुची पासवान अपने बच्चे को पढ़ाने के चक्कर में एक रिक्शा चालक से बुची एक चोर बन जाता है. लेकिन अंत में बुची के बच्चे की मेहनत रंग लाती है और बुलबुल कुमार स्कूल टॉपर बनकर उभरता है.

pic credit: Instagram zee premium

इस पूरी फिल्म में अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए एक माता-पिता के परिश्रम को दर्शाती है. इसके साथ ही हमारे एजुकेशन सिस्टम पर भी एक चोट करती है, जिसमें की अच्छी शिक्षा पाने के लिए एक प्रतिभाशाली गरीब बच्चे के सामने कितनी कठिनाइयां आती हैं. लेकिन फिर उसी समाज से कोई एक मददगार खड़ा होकर बुलबुल की मेहनत को उसके अंजाम तक ले जाने में खास भूमिका निभाता है.


परफॉरमेंस में फ़िल्म कैसी है?
फ़िल्म की कहानी भले ही स्कूली छात्र बुलबुल कुमार (शुभम) के इर्द-गिर्द घूमती हो लेकिन इस फ़िल्म के असली हीरो बूची पासवान (आदिल हुसैन) हैं. इस फिल्म में उन्होंने गरीब रिक्शा चालक के किरदार को बखूबी निभाया है. इसके साथ ही आदिल हुसैन आपको किरदार ‘बुची’ के अनुसार खुद को ढालने की सफलतापूर्ण कोशिश करते हुए पर्दे पर दिखाई देंगे. आदिल हुसैन पर्दे पर एक साधारण व्यक्ति और एक अच्छे रिक्शा चालक के रूप में दर्शकों को दिखाई देंगे जो की अपने ही बेटे को अपने रिक्शे के सीट पर नहीं बैठाते क्योंकि इससे रिक्शे से जाने वाले अमीर बच्चों के माता-पिता को कोई ऐतराज न हो.

राधिका (प्रिंयका बोस) बुलबुल की माँ के रूप में दिखती है, राधिका का किरदार भी आपको एक मजदूर और गरीब माँ की दुनिया में ले जाएगी. जो की अपने खुद के सपनों को मार कर अपने बेटे की उड़ान को पंख लगाने का काम करती है. इसके अलावा बुलबुल कुमार का किरदार निभा रहे शुभम भी पर्दे पर एक सौम्य और एक शांत छात्र के रूप में दर्शकों को दिखेंगे जिसे अपने माता-पिता की मजबूरी और अपनी मेहनत पर पूरा यकीन होता है.

अभयानंद बिहार के पूर्व डीजीपी के जीवन के अनुभवों पर यह फ़िल्म आधारित है . इसी वजह से संजय सूरी ने इस एक्ट को निभाया है जो की कैलाश आनंद फिल्म में रांची के SP बने हैं. कैलाश खुद भी काफी प्रतिभाशाली हैं और वे दिल्ली यूनिवर्सिटी के टॉपर भी रह चुके हैं. वह बूची पासवान को बताते हैं बच्चे को गवर्मेन्ट स्कूल में भी पढ़ाकर भी एक अच्छा मुकाम हासिल कराया जा सकता है और कैलाश खुद इसका एक उदाहरण हैं. कैलाश बूची की बस्ती में जाकर वे अपनी ड्यूटी से इतर बुलबुल समेत कई अन्य गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया करते हैं और अमीर बच्चों के परिवार से उनके बच्चों के कोचिंग क्लासेज देने से इनकार करते हुए कहते हैं कि संसाधनों की आप लोगों के पास क्या कमी है.

प्रकाश झा इस फिल्म के निर्देशक और प्रोड्यूसर है, उनके लिए ऐसी फिल्में का कोई नया अनुभव नहीं है. प्रकाश झा गंगाजल से लेकर अपहरण और मृत्युदंड से लेकर आरक्षण तक, वे ऐसी फिल्में इससे पहले भी बॉलीवुड पर्दे पर लाते रहे हैं. प्रकाश झा फिल्में हमेशा से सामाजिक मुद्दों और सिस्टम की चुनौतियों को पर्दे पर उकेरने का काम पहले से भी करती आ रही हैं. लेकिन इस बार बिना किसी बिग बॉलीवुड स्टार के उन्होंने एक सार्थक और जरूरी फिल्म बनाई है. 6 अगस्त को यह फ़िल्म Zee5 पर रिलीज हुई है और Zee पे ही आप इसे देख सकते हैं.

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